REET मे चीट अभिलेख
प्राचीन काल की बात है पश्चिम भारत में एक विशाल नगर राज्य था जब दुनिया उथल पुथल होकर संग्राम की बला चढ़ चुकी थी तब वहा एक शासक की आरंभिक गाथा का प्रारम्भ हुआ | नगर राज्यो में उसने लूटपाट और लोगों की आजादी के विरूद्ध झंडे गाड़ने शुरू किए | शुरु शुरू मे तो लगा वह जनता के लिए गुलाब के पौधे के समान है फिर उनकी चारों दशाएं विपरीत परिस्थिति में हवा को बिखेरने लगी.... त्रस्त जनता ने उसको उखाड़ फेंकने की कसम खाई....कई सौ वर्षो के बाद वहा की जनता ने आजादी की गंध को पहचाना उसे अपने करीब पाकर लगा कि आज सच में सूर्य पूर्व से ही उदय हुआ है | फिर... फिर क्या जनता को मंत्रिमंडल की तो जरुरत ही होती है मार्गदर्शक की तो अनिवार्य रुप से... शासन चुनाव करवाने की इच्छा व्यक्त की गई | जनता के हदय की बेल से फूलो का रस टपका.... इच्छा के अनुरूप मंत्री मिले.. जो जनता से चलते थ...