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REET मे चीट अभिलेख

                                                                    प्राचीन काल की बात है पश्चिम भारत में एक विशाल नगर राज्य था जब दुनिया उथल पुथल होकर संग्राम की बला चढ़ चुकी थी तब वहा एक शासक की आरंभिक गाथा का प्रारम्भ हुआ | नगर राज्यो में उसने लूटपाट और लोगों की आजादी के विरूद्ध झंडे गाड़ने शुरू किए | शुरु शुरू मे तो लगा वह जनता के लिए गुलाब के पौधे के समान है फिर उनकी चारों दशाएं विपरीत परिस्थिति में हवा को बिखेरने लगी.... त्रस्त जनता ने उसको उखाड़ फेंकने की कसम खाई....कई सौ वर्षो के बाद वहा की जनता ने आजादी की गंध को पहचाना उसे अपने करीब पाकर लगा कि आज सच में सूर्य पूर्व से ही उदय हुआ है | फिर... फिर क्या जनता को मंत्रिमंडल की तो जरुरत ही होती है मार्गदर्शक की तो अनिवार्य रुप से... शासन चुनाव करवाने की इच्छा व्यक्त की गई | जनता के हदय की बेल से फूलो का रस टपका.... इच्छा के अनुरूप मंत्री मिले.. जो जनता से चलते थ...

बात करामात की

                                                                          मेरी पहली तुकबंदी #OLX   झूठ बोलके इन्ने लाला रुपया लिया कमाय। बण बैठा ये रुपया वाळा, अब इन्ने शरम न आय।। बिया काइ को होय चाय, पर डीजे यनको आय। गंदा गाणा, दारू पीके, खूब नाच इतरांय।। खूब नाच इतरांय साथ मे बाहणन ने नचवांय। टुच्चा लुच्चा बेगैरत फिर, पइसो खूब बहांय।। कदी बुलट तो कदी अपाची कदी ये लेंवा थार। कुछ दिन पहले मांग ठूँटिया, पीवे हा जो लार।। बहु मंगावे बिरयानी बाळक ठंढा मंगवांय। रोजी नाको यही राग, होटल सु रोटी आंय।। जिनके ही एक झोंपड़ी और वामे टूटी खाट। नक्शा सु अब बणरा कोठा, न्याळा उनका ठाट।। मामा, बीड़ी सिगरट पींवे और खावें हैं पान। झींगर जैसी सकल है लेके, बणे हैं आमिर ख़ान।। बाप बणे है तब्लीगी और बेटो टटलू बाज़। ऐसा बेटा पे फिर बी, बाप करे है नाज़।। काल ग़सत ही कुछ रस्ता में तास खेलता पाया। बेशर्मी इतनी क...

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