REET मे चीट अभिलेख

                                                                   
प्राचीन काल की बात है पश्चिम भारत में एक विशाल नगर राज्य था जब दुनिया उथल पुथल होकर संग्राम की बला चढ़ चुकी थी तब वहा एक शासक की आरंभिक गाथा का प्रारम्भ हुआ | नगर राज्यो में उसने लूटपाट और लोगों की आजादी के विरूद्ध झंडे गाड़ने शुरू किए | शुरु शुरू मे तो लगा वह जनता के लिए गुलाब के पौधे के समान है फिर उनकी चारों दशाएं विपरीत परिस्थिति में हवा को बिखेरने लगी.... त्रस्त जनता ने उसको उखाड़ फेंकने की कसम खाई....कई सौ वर्षो के बाद वहा की जनता ने आजादी की गंध को पहचाना उसे अपने करीब पाकर लगा कि आज सच में सूर्य पूर्व से ही उदय हुआ है | फिर... फिर क्या जनता को मंत्रिमंडल की तो जरुरत ही होती है मार्गदर्शक की तो अनिवार्य रुप से... शासन चुनाव करवाने की इच्छा व्यक्त की गई | जनता के हदय की बेल से फूलो का रस टपका.... इच्छा के अनुरूप मंत्री मिले.. जो जनता से चलते थे | समय बितता चला गया, परिवर्तन संसार का नियम होता है एक सभ्यता के बाद दूसरी सभ्यता का निर्माण होता है और इसी तरह विशाल भारत के एक कोने में एक सभ्यता का विकास हुआ - नाथी सभ्यता | नाथी सभ्यता अपने कई चरणों में फलीभूत हुई ,आंरभिक दौर में परिलक्षित परिमार्जन का रूप नाथी की सभ्यता ने अनेको शुरवीरों को जन्म दिया | जिसमे जाए जन्मे शुरवीरों ने 21 वी सदी तक के इतिहास में हलचल पैदा कर दी | सभ्यता का प्रमुख केन्द्र था रायथान का उतर -पूर्वी हिस्सा जिसे वर्तमान में हम राजस्थान के नाम से जानते हैं यहा विकसित इस सभ्यता ने नाथी शब्द के अपभ्रंश नात जो कांलातर में नाथ और फिर नाथी बन गया को अपनाया ,कुछ लोग इसे अपभ्रंश का न मानकर लीक काव्य का शब्द मानते है | वस्तुत विद्वानो के विवाद के बाद सर्वमान्य तथ्य यह है कि यह देशज भाषा से निकला अपभ्रंश का ही एक रुप है | नाथी सभ्यता के शासको का नामकरण भी विवाद का एक कारण रहा कई प्रकार नाम तथा दस्तावेज लीक की वजह से शासको की नवीन प्रवृतियाँ सामने आई जिसमें शासको के नामों में यदा कदा परिवर्तन होता रहा | प्रधान प्रवृति के नाम पर यहा के शासक अपने नाम के आगे घोटा, कटोक, धट, प्रटीप ,बटी , रामट्याल, भटन इत्यादि लगाते रहे है जिसमें मुख्यत ट वर्ग की प्रधानता है | नाथी सभ्यता में एक शासक हुआ घोटासरा - प्रांरभिक शिलालेखों से ज्ञात होता है यही घोटासरा नाथी सभ्यता का जनक कहा जाता है क्योंकि उसके पहले शासको का हमें लिखित प्रमाण नहीं मिलता , घोटासरा नाथी सभ्यता का प्रतापी राजा था नाथी अभिलेख से उनके शूरवीर, पराक्रमी और बेरोजगारच्छों का नाशक होने का उल्लेख मिलता हैं उनका एक ओर ताम्रपत्र नाथकी मिलता है जिसमें घोटासरा को घोटू अंकल कहा गया है यह ताम्रपत्र अब उपलब्ध नहीं है | पुरालेख, पुराग्रंन्थों से जुटाई गए तथ्यों के आधार घोटासरा के साथ कई मंत्री , सांमत और कर्मचारी थे जो प्रजा के एक बड़े वर्ग को हर समय आसमान में बादलों के पीछे भेजने में लगे रहते थे दस्तावेजों के लिखत विभाग का भार घोटासरा के पास था जो उनके मार्गदर्शक की निगरानी में चलता था | घोटली अभिलेख में उनके घोटालो का वर्णन मिलता है कहते हैं कि नाथी सभ्यता का सबसे बड़ा घोटाला घोटासरा के शासनकाल में हुआ था जिसमें लगभग 500 मुद्राओं ( करोड़ ) का घीट घोटाला हुआ था सामान्यत घीट उस समय लिखत विभाग में नियुक्त किए जाने वाले कर्मचारियों की एक परीक्षा का नाम था जो ताड़पत्रो पर ली जाती थी | कहा जाता है कि किले के एक भाग में जहा परीक्षा का पेपर ताड़पत्रों पर छापा जा रहा था वहा के कर्मचारियों ने गुप्त तरीके से अपने सगे संबधियों तक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उन ताड़पत्रो को उनमे बाँट दिया | जिस हाथी पालकी से पेपर एक जगह से दूसरी जगह रखा जा रहा था वह रास्ते में गड्डे में गिर गया और उसका महावत मारा गया | महावत के परिजनों को दवाब बनाकर चुप करवा दिया गया | एक गधे से पेपर किले के एक भाग में रखवा दिया जहा से भ्रष्ट कर्मचारियों ने पेपर को चुराकर फिर अपने संगे संबधियों में बंटवा दिया | जनता तो भोली और मजबूरी की मारी थी - पेपर का आयोजन घीटोत्सव के नाम से जोरो शोरो से किया गया, कई जगह लिप्त कर्मचारी को पकड़ा गया , नाथकी अभिलेख के सप्तम सर्ग में लिखा है कि नाथी सभ्यता घीटोत्सव मे एक कर्मचारी चप्पल में पेपर की भ्रष्ट सामग्री निर्माण करके लाया था जिसकी हाट में किमत 5 मुद्रा [ लाख ] आंकी गई थी | धीरे धीरे जनता के बड़े वर्ग ने इन लिप्त भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़ने की माँग उठाई , प्रजा के एक व्यक्ति ने कहा कि हमें लिखत कर्मी का पद चाहिए हमें पद दो तो घोटासरा ने यह कहते हुए चुप करवा दिया कि यह कोई नाथी का बाडा़ है क्या जो मुँह उठाए चले आए तो प्रजा के लोगों में रोष व्याप्त हो गया, जगह जगह धरने प्रदर्शन किए गए , पुतला जलाकर उनके काले कारनामों का विरोध किया गया | तभी एक विभाग हुआ करता था जो निष्पक्ष निर्णय हेतू जाना जाता था उसने जाँच कार्य हेतु इसको अधिग्रहीत किया तो घोटासरा ने अपनी संलिप्तता पाए जाने की आशंका के चलते समस्त लिखित विभाग से इस्तीफा दे दिया लेकिन उनकी लीक कार्यप्रणाली को देखते हुए सरकार ने उन्हें फिर से एक अन्य विभाग में पद दे दिया | जब विभाग निष्पक्ष जांच कर रहा था तो उसने पाया कि पूरा घोटासरा विभाग ही इसमें सम्मिलित है मुखिया ने इसे राजनीतिक हवा कहकर टालने की कोशिश की | जनता के मुखर व्यक्तियों ने सुत्रो से पता लगाया तो नाथी सभ्यता के निम्न आंकड़े सामने आए - 1- पेपर लभगभ 15000 से 20000 लोगो तक पहुँचा 2- घीटोत्सव के घोटाले में पेपर छपने के छापाखाने का 20-25 करोड का घोटाला 3- नीचे से ऊपर तक सब कर्मचारी इसमें लिप्त है 4- पेपर की शुरुआत किमत 2.5 करोड़ रूपए 5 एक शहर में एक महिला ने पेपर को 4 से 5 हजार लोगो में बाँटा | और इस तरह अनेकों आरोपो को समय की कमी के चलते यहा वर्णित नहीं कर सकते हैं फिर भी निष्पक्ष जांच आयोग की रिपोर्ट पर घीटोत्सव बोर्ड के अध्यक्ष समेत अनेक लोगो को बर्खास्त और निलंबित करके मुखिया ने फाईल के हुक बंद करने की ओर इशारा कर दिया | और इस तरह घीटोत्सव के घोटासरा ने नाथी सभ्यता की लाज रख ली, नाथी सभ्यता को उजाड़ होने से बचा लिया लेकिन जनता थी सबकुछ समझ चुकी थी उसे पता था कि पानी में पाद मारेगा तो बुलबुला तो ऊपर ही आयेगा | निष्पक्ष आयोग की जांच जारी है रिपोर्ट आनी बाकि है घीटोत्सव के इस महासंग्राम और नाथी सभ्यता की प्रमुख देवी रीट माता को सादर नमन | लेखक - आत्मा की आवाज़ (M) नोट 👈 ये लेखक के निजी विचार है | फिर भी आपके विचारों का स्वागत है |

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

आतंकवाद / TERRORISM

🇮🇳 India Women vs Australia Women ODI World Cup Semi-Final – Updates!

इन महिलाओं से शादी करने से बचें / Avoid Marrying These Women

धैर्य की ताकत / Power of patience

बात करामात की

वापिस लौटना कभी आसान नहीं होता / Returning is Never Easy

Popular Post

सफलता का पहला कदम / First Step of Success / सफलता के राज

आतंकवाद / TERRORISM