झूठ बोलने की पाचन शक्ति और कला
झूठ के फेर में न फंसना बेहतर विकल्प 👉इंसान के पास बड़ी अद्भुत पाचनशक्ति होती है। तेजाब जैसा तेज पदार्थ भी पेट के भीतर रहता है और नुकसान नहीं होता। जिन्हें झूठ बोलने से बचना हो, जो सत्य का पालन करना चाहते हों, उनकी पाचनशक्ति बहुत तगड़ी होनी चाहिए। जिनकी पाचन शक्ति कमजोर होती है, ऐसे लोग झूठ भी बहुत बोलते हैं और आजकल तो झूठ बोलना अपराध नहीं, कला बन गया है। बड़े-बड़े देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तक बहुत सफाई से झूठ बोल जाते हैं। लाख हिसाब रखो, उनको कोई फर्क नहीं पड़ता। जनता भी मानकर चलती है कि झूठ बोलना इनकी आदत है। गहराई में जाएं तो एक मामले में झूठ बोलने में हम भी बड़े - बड़े राजनेताओं पर भारी पड़ जाते हैं और वह है मन का मामला। मन ही मन हम भी इतना झूठ, इतना गलत बोल जाते हैं कि जिसकी कोई सीमा नहीं। वो लोग बाहर बोलते हैं तो दूसरे भी सुन लेते हैं। हम मन ही...